कर्नाटक सरकार ने गुरुवार को सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सिर्फ पहले 2 अंतरे गाने का आदेश जारी किया है।
यह आदेश राज्य में होने वाले सरकारी कार्यक्रमों पर लागू होगा। लेकिन राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल के शामिल होने वाले कार्यक्रमों को इससे बाहर रखा गया है।
इसी साल 9 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया था कि सभी सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के साथ ‘वंदे मातरम’ के सभी 6 पद गाए जाएं।
इसके बाद 19 अगस्त को कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने वंदे मातरम को लेकर 1937 के अपने प्रस्ताव का पालन करने का फैसला किया। इस प्रस्ताव के तहत पार्टी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल 2 पैरा जाते हैं।
ग्रेस वर्किंग कमेटी ने ऐलान किया था कि पार्टी अपने सभी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के 6 में से सिर्फ शुरुआती दो पैरा गाएगी। यह फैसला 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम के गायन को लेकर हुए विवाद के बाद आया।
कांग्रेस का यह फैसला बीजेपी के उन आरोपों के बाद आया था, जिसमें बीजेपी ने कांग्रेस नेताओं पर पार्टी कार्यक्रमों में वंदे मातरम का पूरा संस्करण नहीं गाकर उसका अपमान करने का आरोप लगाया था।
2026 वंदे मातरम के अपमान पर कानून बना
24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत घोषित किया था। लंबे समय तक इसके अपमान पर कोई अलग कानून नहीं था, लेकिन 2026 के मानसून सत्र में केंद्र सरकार ने ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ बनाया।
इस कानून के तहत ‘वंदे मातरम’ के गायन को जानबूझकर रोकने, इसमें बाधा डालने या इसका सार्वजनिक अपमान करने को दंडनीय अपराध माना गया है। ऐसा करने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है।
इस बार 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पहली बार लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम’ के पूरे 6 छंद गाए गए।

