जून में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.87% पर पहुंच गई है। यह पिछले महीने 9.68% पर थी। जून में महंगाई 44 महीने में सबसे ज्यादा है। सितंबर 2022 में ये 10.70% पर पहुंच गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 14 जुलाई को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं।
महंगाई बढ़ने की वजह रोजमर्रा की जरूरत के सामान और खाने-पीने की चीजों का महंगा होना है। अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी से चल रहा तनाव कम नहीं हुआ तो इसके दामों में और इजाफा हो सकता है। इससे पहले कल रिटेल महंगाई के आंकड़े जारी हुए थे। रिटेल महंगाई भी लगातार छठे महीने बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई है।
रोजाना जरूरत के सामान के दाम बढ़े
- रोजाना की जरूरत वाले सामानों (प्राइमरी आर्टिकल्स) की महंगाई 4.99% से बढ़कर 7.00% हो गई है।
- खाने-पीने की चीजों (फूड इंडेक्स) की महंगाई 4.49% से बढ़कर 6.14% पर पहुंच गई है।
- फ्यूल और पावर की थोक महंगाई दर 30.33% से घटकर 27.41% हो गई है।
- मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई में कोई बदलाव नहीं है। यह 7.48% रही।
होलसेल महंगाई के 4 हिस्से
प्राइमरी आर्टिकल, जिसका वेटेज 22.62% है। फ्यूल एंड पावर का वेटेज 13.15% और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट का वेटेज सबसे ज्यादा 64.23% है। प्राइमरी आर्टिकल के भी चार हिस्से हैं।
- फूड आर्टिकल्स जैसे अनाज, सब्जियां
- नॉन फूड आर्टिकल में ऑयल सीड आते हैं
- मिनरल्स
- क्रूड पेट्रोलियम

